बोनस और कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं पर ECREU और IREF का देशभर में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन सफल रहा :_ संतोष पासवान

हाजीपुर:_IREF के देशव्यापी आवाहन पर ईस्ट सेंट्रल रेलवे ईम्पलाईज यूनियन द्वारा ECR जोन के, सभी मंडलों, उत्पादन इकाइयों एवं कार्यशालाएं

में राष्ट्रव्यापी सांकेतिक विरोध प्रदर्शन/गेट मिटींग आयोजित किया गया। यूनियनों ने बोनस के नाम पर रेल कर्मचारियों से किए जा रहे छलावे और उनकी अन्य लंबित मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने का ऐलान किया है।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी को प्रेषित ज्ञापन (पत्र संख्या: IREF/RB/2026/007) के माध्यम से बोनस और उस पर सरकार द्वारा किए जा रहे भ्रामक प्रचार पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है।

यूनियनों का कहना है कि जब सरकार “78 दिन के बोनस” की घोषणा करती है, तो आम जनता को लगता है कि कर्मचारियों को उनकी वर्तमान बेसिक सैलरी के हिसाब से भारी राशि मिली है। उदाहरण के तौर पर कोल इंडिया (Coal India) के कर्मचारियों को ₹1,03,000 से अधिक का बोनस दिया जाता है, जबकि रेल कर्मचारियों को मात्र लगभग ₹18,000 दिए जाते हैं।

 

वर्तमान में 7वां वेतन आयोग (7th CPC) लागू है और न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 है, लेकिन सरकार बोनस की गणना छठे वेतन आयोग (6th CPC) की ₹7,000 की पुरानी काल्पनिक सीमा पर ही कर रही है। इसके परिणामस्वरूप कर्मचारी के हाथ में मात्र ₹17,951 (लगभग ₹18,000) ही आते हैं।

इस भ्रामक प्रचार के कारण समाज में रेल कर्मियों के प्रति गलतफहमी पैदा होती है।

हमारी यूनियन केंद्र सरकार/रेल मंत्री/रेलवे बोर्ड से प्रमुख 10-सूत्री मांग करती है:

 

PLB बोनस का भुगतान ₹7,000 की पुरानी सीमा के बजाय 7वें वेतन आयोग के न्यूनतम वेतन (₹18,000) के आधार पर किया जाए।

 

रेलवे के सभी जोनों, मंडलों और वर्कशॉप में लंबे समय से खाली पड़े लाखों पदों पर तत्काल पक्की भर्ती की जाए।

 

ईस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लॉईज यूनियन से जुड़े फेडरेशन IREF को BRMS की तर्ज पर रेलवे बोर्ड में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।

 

8वें वेतन आयोग का गठन शीघ्र किया जाए तथा NPS/UPS को निरस्त कर सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए।

 

रेलवे में निजीकरण, निगमीकरण, PPP, FDI, आउटसोर्सिंग, ठेकेदारी तथा RLDA द्वारा बहुमूल्य रेल भूमि कॉर्पोरेट को बेचने पर तुरंत रोक लगाई जाए।

 

चारों नए लेबर कोड्स को रद्द कर श्रमिकों के अधिकार बहाल किए जाएं।

 

मान्यता प्राप्त यूनियन ECREU को अभी तक यूनियन कार्यालय अविलंब दिया जाए।

 

रेल कर्मियों के माता-पिता को परिवार का हिस्सा मानकर रेलवे पास एवं मेडिकल सुविधाएं दी जाएं।

 

उपरोक्त मांगों को लेकर समस्तीपुर मंडल के दरभंगा स्टेशन स्थित इंजीनियरिंग विभाग स्टोर, c& वैगन विभाग में में गेट मिटींग कर विरोध प्रदर्शन किया गया।

 

इस अवसर पर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष संतोष पासवान ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “रेलवे सार्वजनिक सेवा है, व्यापार का साधन नहीं!”

श्री पासवान ने कहा कि ने स्पष्ट किया कि दुनिया के कई देशों में रेलवे के निजीकरण के दुष्परिणाम उजागर हो चुके हैं। सुरक्षित रेल परिचालन, स्थायी रोजगार और रेल कर्मियों के सम्मान की रक्षा के लिए सभी कर्मचारियों का एकजुट होना आवश्यक है। यह लड़ाई केवल ₹18,000 की नहीं, बल्कि रेल कर्मियों के आत्मसम्मान और अधिकारों की है।

 

यूनियन मांग करती है कि उपरोक्त महत्वपूर्ण समस्याओं को केंद्र सरकार/ रेल मंत्री व रेलवे बोर्ड समाधान करने करेगी।

अगर सरकार कर्मचारियों के समस्याओं का समाधान नहीं करती है तो इसके खिलाफ आंदोलन को और भी तेज किया गया।

 

इस अवसर पर सभा की अध्यक्षता दरभंगा शाख अध्यक्ष प्रमोद यादव व संचालन शाखा सचिव राकेश पासवान ने किया। वहीं मंडल सचिव संजीव मिश्रा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि रेलवे को निजीकरण निगमीकरण आउटसोर्सिंग ठेकेदारी प्रथा को के माध्यम से बर्बाद करने पर तुला हुआ है। श्री उन्होंने कर्मचारियों से मजदूर विरोधी लेबर कोड को रद्द करने के लिए संघर्ष तेज करने का आवाहन किया। इस अवसर पर मंडल कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश पासवान, प्रमोद साहू,लाल बाबू पासवान आदि दर्जनों लोगों ने भाग लिया।

 

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Author: Darpan 24 News


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