ऐक्टू ने बैंक कर्मियों के तीन दिवसीय हड़ताल का किया समर्थन

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफ़बीयू) की मांगे जायज़- ऐक्टू

मोदी सरकार कॉरपोरेट एनपीए के लाखों-करोड़ों रुपये माफ कर रही, वहीं बैंक कर्मचारियों को काम करने की मानवीय स्थितियां देने से भी इनकार कर रही – देवेन्द्र कुमार

 

काॅर्पोरेटपरस्त मोदी सरकार ने पिछले 4 वर्षों में 26000 बैंक कार्यबलों की कटौती कर दी, जबकि इस अंतराल में बैंक खाता की संख्या 146 करोड़ से बढ़कर 160 करोड़ हो गया – ऐक्टू

 

दरभंगा :_ ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) ने यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफ़बीयू) के आह्वान पर कल 28 सितम्बर से शुरू होने वाले बैंक कर्मियों की हड़ताल व उनकी जायज मांग का समर्थन किया है। ऐक्टू ने बैंक कर्मचारियों और पदाधिकारियों के साथ अपनी एकताबद्ध, जुझारु और साहसी संघर्ष को अपना पूरा समर्थन देने की घोषणा की है।

 

ऐक्टू जिला सचिव उमेश प्रसाद साह एवं मजदूर नेता देवेन्द्र कुमार ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि

11 सितंबर 2026 को एकदिनी सफल हड़ताल के बाद, यूएफ़बीयू ने अब 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को 3 दिन हड़ताल करने और उसके बाद अक्टूबर 2026 से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय किया है,जिसका ऐक्टू स्वागत करता है।

 

ऐक्टू नेताओं ने उन मांगों का समर्थन किया है जिन मांगों की पूर्ति को लेकर बैंक कर्मी हड़ताल पर जा रहे है। नेताओं ने उनकी मुख्य मांगों में साप्ताहिक काम के घंटों में कटौती किए बिना पांच दिन के बैंकिंग सप्ताह को लागू करना शामिल है, नेताओं ने बताया कि इस आशय का समझौता 2024 में हो चुका है पर मोदी सरकार जानबूझकर अधिसूचना जारी नहीं कर रही। जबकि केंद्र सरकार के अधीन आरबीआई,एलआईसी यहां तक कि स्टॉक मार्केट भी 5 दिन काम करते है। *ऐक्टू ने बैंक कर्मियों के लिए सप्ताह में पांच दिन काम को तुरंत लागू करने की मांग किया* साथ ही अन्य मांगो जिसमें बैंक कर्मचारियों को बांटने वाली परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) जो कर्मचारियों के बीच भेदभाव पैदा करने, वेतन को मुनाफे से जोड़ने और सामूहिक सौदेबाजी(collective

bargaining) को खत्म करने का एक बांटने वाला तरीका बताया है।

 

ऐक्टू नेताओं ने केंद्र सरकार के इस कदम पर विरोध जताते हुए बैंक कर्मचारियों का संघर्ष, हड़ताल को सही और जायज बताया है।

 

ऐक्टू नेता उमेश प्रसाद साहऔर मजदूर नेता देवेन्द्र कुमार ने कहा कि जहां सरकार कॉरपोरेट एनपीए के लाखों-करोड़ों रुपये माफ कर रही है, वहीं वह बैंक कर्मचारियों को काम करने की मानवीय स्थितियां देने से भी इनकार कर रही है, जो जन ,धन, मुद्रा और सभी सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की रीढ़ हैं।

*बैंक कर्मचारी काफी दबाव और तनाव में अपना कार्य सम्पादित करने को मजबूर है। *पिछले 4 वर्षों में ही 26000 कार्यवलों की कटौती काॅर्पोरेटपरस्त मोदी सरकार ने कर दी जबकि इसी अंतराल में बैंक खाता की संख्या 146 करोड़ से बढ़कर 160 करोड़ हो गया और सरकारी बैंको का मुनाफा तीन गुणा बढ़ा।*

 

ऐक्टू और उससे संबद्ध यूनियनें मजबूती से बैंक कर्मचारियों के साथ खड़ी हैं।

 

*ऐक्टू नेताओं ने मोदी सरकार से मांग किया है कि बैंक कर्मियों की सभी मांगो को शीघ्र पूरी करे*।

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Author: Darpan 24 News


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