
गैरकानूनी S I R की प्रक्रिया रद्द करो:किसान महासभा

S I R के बाद हुए बिहार और बंगाल का चुनाव रद्द करो! होने वाले पांच राज्यों का चुनाव SIR के पूर्व का वोटर लिस्ट जनवरी 2025 के आधार पर चुनाव कराओ:_सुनील कुमार राव
बेतिया 08 अक्टूबर! अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय पार्षद व जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने सर्किट हाउस चौक पर पुतला दहन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा लोकतंत्र के हत्यारे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता सहित चुनाव आयोग के सभी सहयोगी पदाधिकारियों को बर्खास्त किया जाए! गैर कानूनी S I R की प्रक्रिया रद्द हो तथा S.I.R के बाद हुए बिहार और बंगाल का चुनाव रद्द किया जाए! वही होने वाले पांच राज्यों का चुनाव S I R के पूर्व का वोटर लिस्ट जनवरी 2025 के आधार पर हो। मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद हमारी जमीनों की कारपोरेट लूट, खेती पर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों कि जकड़ के दरवाजे खोल दिए हैं. अब एसआईआर के जरिये हमारे वोटों की चोरी का इंतजाम कर हमारे वोट के अधिकार पर भी बड़ा हमला कर दिया गया है.
उन्होने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों पर लगी रोक तथा वोट व चुनाव चोरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्र-युवाओं, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर पुलिस दमन की कड़ी निंदा की है.
किसान महासभा के जिला सचिव और राज्य पार्षद इंद्रदेव कुशवाहा ने कहा कि आजादी की लड़ाई के साथ देश के किसानों ने जमींदारी विनास और बराबरी के हक की मांग जोड़ी थी. तब हमें मिला जमीन का मालिकाना हक, लोकतंत्र के साथ बराबर मूल्य के एक वोट का हक, आजादी के उस संघर्ष की ही देन है. मोदी सरकार ज्ञानेश कुमार के माध्यम से एसआइआर कराकर किसानों-मजदूरों के वोट का संवैधानिक हक छीन रही है ।
किसान महासभा के राज्य षरिषद सदस्य बिनोद यादव ने कहा है कि एसआईआर के जरिये देश भर में हटाए गए नामों में 90 प्रतिशत से ज्यादा गरीब और बटाईदार किसानों-मजदूरों के वोट ही हैं. आज देश भर में एसआईआर को रद्द करने, ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी के साथ लोकतंत्र को बचाने की मांग पर चल रहे आन्दोलन के साथ किसान महासभा अपनी एकजुटता प्रदर्शित करती है. देश के किसान अपनी खेती, जमीन और वोट के अधिकार की रक्षा के लिए इस दूसरी आजादी की लड़ाई में भी पीछे नहीं रहेंगे. किसान महासभा ने किसानों के बीच फैलाई जा रही गैर राजनीति की धारा को किसान हितों के खिलाफ बताया.
किसान महासभा के जिला पार्षद संजय यादव ने आगाह किया कि किसानों-मजदूरों के खिलाफ नीतियाँ बनाने वाली संसद-विधानसभाओं में, किसानों-मजदूरों के लिए जमीन पर लड़ने वाले प्रतिनिधियों के न पहुँच पाने के लिए यही विचार जिम्मेदार हैं. जबकि देश की बहुसंख्या किसान और मजदूर हैं, इन्हीं के वोट सरकारों को बनाने और गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पिछले 12 वर्षों में कारपोरेट के पक्ष में नीतियाँ बनाने, खेती, रोजगार और जमीनों पर नीतिगत हमलों के कारण किसानों-मजदूरों के अन्दर भाजपा–आरएसएस के खिलाफ गुस्सा बढ़ा है. कार्यक्रम मे महम्मद जफिर, सुजायत अंसारी, नुर होदा अंसारी, मंगल यादव, शैख जौउवार आदि मौजूद रहे!
Author: Mr.M.H. Khan










