
दरभंगा:_ लोकवार्ता के बैनर तले लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विमर्श की पहल ‘बिहार बचाएगा लोकतंत्र’ के अंतर्गत तीसरा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता लोकवार्ता के संयोजक मनीष पासवान ने किया और संचालन अनुपमा भारद्वाज ने किया। इसमें डॉ. कन्हैया कुमार, प्रो. मुनेश्वर यादव, डॉ. राकेश रंजन, इंजीनियर फुलेश्वर सिंह सहित कई प्रबुद्ध वक्ताओं ने मिथिला की लोकतांत्रिक विरासत, लोक-बुद्धि और सामाजिक सहभागिता पर विचार रखे।


लोकवार्ता के संयोजक मनीष पासवान ने दरभंगा महाराज के संस्थान निर्माण और शैक्षणिक परंपरा में योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने जननायक कर्पूरी ठाकुर के सामाजिक न्याय और आरक्षण के लिए किए गए प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने गोनू झा जैसे लोक-प्रतीकों का उदाहरण देते हुए मिथिला की लोक-बुद्धि और तर्कशील परंपरा की चर्चा की।
अनुपमा भारद्वाज ने लोकवार्ता और ‘बिहार बचाएगा लोकतंत्र’ अभियान की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक सवालों के उत्तर खोजने के लिए लोक की सामूहिक स्मृति, अनुभव और ज्ञान की ओर लौटना आवश्यक है।
डॉ. कन्हैया कुमार ने सह-अस्तित्व और सहयोग को ‘लोक’ की बुनियाद बताते हुए मिथिला की साझा सांस्कृतिक परंपराओं और छठ जैसे पर्वों का उदाहरण दिया, जिनमें सामुदायिक संसाधनों और सहभागिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इंजीनियर फुलेश्वर सिंह ने बाढ़ प्रबंधन, तालाबों और पारंपरिक जल-प्रबंधन प्रणालियों पर अपने अनुभव साझा किए तथा स्थानीय संसाधनों के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. राकेश रंजन ने ‘लोक लाज’ और ‘लोक नियति’ को लोकतांत्रिक मूल्यों का आधार बताते हुए कहा कि अभिव्यक्ति का भय लोकतंत्र को कमजोर करता है।
प्रो. मुनेश्वर यादव ने मिथिला की समृद्ध विरासत और दरभंगा महाराज के संस्थान निर्माण में योगदान की चर्चा की। उन्होंने वैश्वीकरण के दौर में स्थानीय संस्थाओं, संस्कृति और संसाधनों को मजबूत करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र को केवल संस्थाओं तक सीमित न रखकर उसे समाज के व्यवहार, संवाद और सामूहिक जीवन का हिस्सा बनाना रहा।
Author: Darpan 24 News










