जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने दीप प्रज्वलित कर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया शुभारंभ।

वैज्ञानिक साक्ष्यों का सही संकलन, सुरक्षित संरक्षण एवं न्यायालय में प्रभावी प्रस्तुतीकरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर।
MedLEaPR पोर्टल से चिकित्सकीय प्रतिवेदनों के निष्पादन में आएगी तेजी, समयबद्धता एवं पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा
पुलिस, चिकित्सक, फॉरेंसिक विशेषज्ञ एवं अभियोजन पदाधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय से सुदृढ़ होगी आपराधिक न्याय प्रणाली।
बेतिया एवं बगहा पुलिस जिला के कुल 283 पुलिस पदाधिकारियों एवं नामित चिकित्सकों को तीन चरणों में दिया जाएगा प्रशिक्षण।

बेतिया:_ आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों की बढ़ती महत्ता, अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार, चिकित्सकीय प्रतिवेदनों के समयबद्ध निष्पादन तथा पुलिस, चिकित्सा एवं अभियोजन तंत्र के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से आज समाहरणालय सभागार, पश्चिम चम्पारण, बेतिया में तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन-सह-प्रभारी पदाधिकारी, जिला विधि शाखा अमरेन्द्र कुमार, सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार सहित प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी, चिकित्सक, अभियोजन पदाधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ तथा प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने आपराधिक मामलों के अनुसंधान में वैज्ञानिक साक्ष्यों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में प्रभावी अनुसंधान एवं न्यायालय में अभियोजन की सफलता के लिए साक्ष्यों का विधिसम्मत एवं वैज्ञानिक तरीके से संकलन, संरक्षण तथा प्रस्तुतीकरण अत्यंत आवश्यक है। अनुसंधान के प्रारंभिक चरण से ही साक्ष्यों की शुद्धता, विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली में पुलिस, चिकित्सक, फॉरेंसिक विशेषज्ञ एवं अभियोजन पदाधिकारी सभी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इन सभी के बीच बेहतर समन्वय एवं सूचनाओं का समयबद्ध आदान-प्रदान होने से अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है। साथ ही, न्यायालय में उपलब्ध कराए जाने वाले साक्ष्यों एवं प्रतिवेदनों की उपयोगिता तथा विश्वसनीयता भी बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने चिकित्सकीय प्रतिवेदनों के समयबद्ध निष्पादन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जख्म प्रतिवेदन एवं अन्य चिकित्सकीय परीक्षण प्रतिवेदन आपराधिक मामलों के अनुसंधान एवं अभियोजन में महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। इन प्रतिवेदनों की उपलब्धता में अनावश्यक विलंब होने से अनुसंधान एवं न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए संबंधित पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों को निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए प्रतिवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करना चाहिए।
जिलाधिकारी ने MedLEaPR पोर्टल के प्रभावी उपयोग को इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि डिजिटल प्रणाली के माध्यम से चिकित्सकीय प्रतिवेदनों के ऑनलाइन निष्पादन एवं संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान में तेजी लाई जा सकती है। इससे प्रतिवेदनों के निष्पादन में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं कार्यकुशलता बढ़ेगी तथा पुलिस अनुसंधान को आवश्यक चिकित्सकीय अभिलेख समय पर उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आपराधिक अनुसंधान में वैज्ञानिक एवं तकनीकी पद्धतियों का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। घटनास्थल से प्राप्त भौतिक एवं जैविक साक्ष्यों का उचित संकलन, पैकेजिंग, सीलिंग, संरक्षण तथा सुरक्षित हस्तांतरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन प्रक्रियाओं में निर्धारित मानकों का अनुपालन किया जाना आवश्यक है, ताकि साक्ष्यों की विश्वसनीयता बनी रहे तथा न्यायालय में उनका प्रभावी उपयोग किया जा सके।
जिलाधिकारी ने प्रशिक्षणार्थियों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे प्रशिक्षण कार्यक्रम को गंभीरता से लें तथा विषय विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारियों को भलीभांति आत्मसात करें। प्रशिक्षण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब प्राप्त जानकारी एवं कौशल का उपयोग नियमित कार्यप्रणाली में किया जाएगा।
उन्होंने विशेष रूप से पुलिस पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने तथा अनुसंधान से संबंधित चिकित्सकीय एवं वैज्ञानिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
*तीन चरणों में 283 प्रतिभागियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण*
दिनांक 28, 29 एवं 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में बेतिया एवं बगहा पुलिस जिला के पुलिस पदाधिकारियों तथा नामित चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रथम दिवस 95, द्वितीय दिवस 94 एवं तृतीय दिवस 94 प्रतिभागियों की सहभागिता निर्धारित की गई है। इस प्रकार तीनों चरणों में कुल 283 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किए जाने का कार्यक्रम है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम को इस प्रकार तैयार किया गया है कि प्रतिभागियों को आपराधिक अनुसंधान, चिकित्सकीय प्रतिवेदन, वैज्ञानिक साक्ष्य प्रबंधन तथा न्यायालय में साक्ष्यों के उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त हो सके।
*MedLEaPR पोर्टल के माध्यम से चिकित्सकीय प्रतिवेदनों के ऑनलाइन निष्पादन पर विशेष प्रशिक्षण*
प्रशिक्षण के दौरान MedLEaPR पोर्टल के उपयोग से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। इसमें जख्म प्रतिवेदन, अन्य चिकित्सकीय परीक्षण प्रतिवेदन तथा संबंधित अभिलेखों के ऑनलाइन निष्पादन की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रतिभागियों को पोर्टल के प्रभावी संचालन, आवश्यक सूचनाओं की प्रविष्टि तथा चिकित्सकीय प्रतिवेदनों के समयबद्ध निष्पादन से संबंधित प्रक्रियाओं से अवगत कराया जा रहा है।
इस पहल का प्रमुख उद्देश्य चिकित्सकीय प्रतिवेदनों के निष्पादन में होने वाले विलंब को कम करना, अभिलेखों के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाना तथा पुलिस एवं चिकित्सा विभाग के बीच समन्वय को बेहतर करना है।
*वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन एवं संरक्षण में निर्धारित मानकों के अनुपालन पर जोर*
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत घटनास्थल से भौतिक एवं जैविक साक्ष्यों के वैज्ञानिक तरीके से संकलन, उनकी उचित पैकेजिंग, सीलिंग, लेबलिंग, संरक्षण एवं सुरक्षित हस्तांतरण के संबंध में विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
प्रतिभागियों को यह भी बताया जा रहा है कि साक्ष्यों के संकलन से लेकर संबंधित प्रयोगशाला अथवा प्राधिकृत पदाधिकारी को हस्तांतरित किए जाने तक निर्धारित प्रक्रियाओं का अनुपालन करना आवश्यक है।
साक्ष्यों की अभिरक्षा श्रृंखला (Chain of Custody) बनाए रखने, उनके संदूषण अथवा क्षतिग्रस्त होने की संभावना को कम करने तथा साक्ष्यों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
*अनुसंधान एवं अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय से न्यायिक प्रक्रिया को मिलेगी मजबूती*
प्रशिक्षण के दौरान पुलिस अनुसंधान एवं अभियोजन से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी एवं व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा की जा रही है। इसमें अनुसंधान के दौरान संकलित साक्ष्यों की न्यायालय में प्रासंगिकता, चिकित्सकीय एवं वैज्ञानिक प्रतिवेदनों की उपयोगिता तथा साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण से संबंधित विषय शामिल हैं।
विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को अनुसंधान के दौरान आवश्यक सावधानियों, अभिलेखों के उचित संधारण तथा अभियोजन पक्ष के साथ प्रभावी समन्वय की आवश्यकता के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
*विषय विशेषज्ञों द्वारा दिया जा रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण*
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस अनुसंधान एवं अभियोजन से संबंधित विषयों पर सहायक अभियोजक राजशंकर सहनी एवं अभियोजन पदाधिकारी कार्तिकेय शिवम द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
MedLEaPR पोर्टल के संचालन एवं उपयोग से संबंधित प्रशिक्षण डॉ. के. बी. एन. सिंह, अनुमंडलीय अस्पताल, बगहा द्वारा दिया जा रहा है।
वहीं, घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन, पैकेजिंग, सीलिंग, संरक्षण एवं सुरक्षित हस्तांतरण से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर एफएसएल विशेषज्ञ कौशलेन्द्र कुमार चौधरी द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
*प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का किया गया समाधान*
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों के लिए प्रश्नोत्तर सत्र एवं व्यावहारिक चर्चा का भी आयोजन किया गया। इसमें पुलिस अनुसंधान, चिकित्सकीय प्रतिवेदनों के निष्पादन, वैज्ञानिक साक्ष्यों के संरक्षण तथा अभियोजन से संबंधित प्रक्रियात्मक समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया।
विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए विभिन्न प्रक्रियाओं के व्यावहारिक अनुपालन के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से पुलिस पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों की तकनीकी दक्षता में वृद्धि होने, चिकित्सकीय प्रतिवेदनों के निष्पादन में तेजी आने, वैज्ञानिक साक्ष्यों के संरक्षण की प्रक्रिया सुदृढ़ होने तथा अनुसंधान एवं अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की अपेक्षा है।
जिला प्रशासन का उद्देश्य वैज्ञानिक एवं तकनीकी पद्धतियों के प्रभावी उपयोग, डिजिटल प्रक्रियाओं के समुचित अनुपालन तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से आपराधिक मामलों के अनुसंधान एवं अभियोजन की गुणवत्ता को निरंतर सुदृढ़ करना है।
Author: Mr.M.H. Khan










