
दरभंगा :_ओझा-गुणी और अंधविश्वास का चक्कर एक बार फिर एक भीहंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लिया! घटना दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र के सहसराम पंचायत अंतर्गत अथार गांव की है। शुक्रवार की रात लगभग 11:30 बजे, पलटन मांझी के 29 वर्षीय पुत्र धर्मेंद्र माझी को सोते समय एक जहरीले सांप ने काट लिया। शुरुआत में धर्मेंद्र को अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन जब शरीर में बेचैनी बढ़ने लगी, तो वह अस्पताल जाने के बजाय गांव के ही एक ओझा के पास पहुंचे।

ओझा ने तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक करने के बाद कहा, “जाओ, सब ठीक हो जाएगा।” लेकिन हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ने लगी। इसके बाद परिजन उन्हें दूसरे ओझा के पास ले गए, जहां फिर वही झाड़-फूंक का ड्रामा दोहराया गया। इस तरह पूरी रात झाड़-फूंक में बीत गई और सुबह के 7 बज गए।
जब धर्मेंद्र की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई, तब परिजन उन्हें बिरौल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (DMCH) रेफर कर दिया। सुबह लगभग 9:30 बजे धर्मेंद्र को DMCH पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन देर हो चुकी थी। महज आधे घंटे के इलाज के बाद 29 वर्षीय धर्मेंद्र ने दम तोड़ दिया।
अस्पताल परिसर में परिजनों की चीख-पुकार मच गई। धर्मेंद्र की शादी को महज 7-8 साल हुए थे। वे अपने पीछे तीन छोटे-छोटे मासूम बच्चों और पत्नी को छोड़ गए हैं, जिनका अब कोई सहारा नहीं बचा।रोते-बिलखते परिजनों ने अस्पताल में स्वीकार किया कि पूरी रात ओझा और तांत्रिक के चक्कर में रहने के कारण यह हादसा हुआ। अगर समय रहते धर्मेंद्र को अस्पताल लाया जाता, तो आज उनकी जान बचाई जा सकती थी।
दोस्तों, यह घटना हम सभी के लिए एक बड़ी सीख है। सांप काटने पर झाड़-फूंक या ओझा-तांत्रिक के पास जाने से सिर्फ कीमती समय बर्बाद होता है। सांप का जहर शरीर में फैलने के बाद मरीज की जान केवल और केवल एंटी-वेनम injection से ही बचाई जा सकती है, जो सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है।
हमारी सरकार और समाज दोनों से अपील है कि ग्रामीण इलाकों में इस अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि किसी और परिवार का चिराग ऐसे न बुझे। सर्पदंश होने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल जाएं।
ओझा या तांत्रिक के चक्कर में समय बर्बाद न करें।
Author: Darpan 24 News









