बिहार MLC शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र दरभंगा के संभावित निर्दलीय उम्मीदवार अरुण कुमार झा ने ठोका ताल लोकवार्ता के बैनर तले ‘बिहार बचाएगा लोकतंत्र’ का तीसरा कार्यक्रम आयोजित बिना नोटिस आयुष चिकित्सकों के क्लिनिको मे छापामारी कतई बर्दाश्त नहीं करेगा नीम संगठन-डा सुमित कुमार,जिला अध्यक्ष। आशा फैसलिटेटर संघ एटक की बैठक में उठा हक और सम्मान का मुद्दा, 30 दिन के भुगतान समेत कई मांगों पर जोर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर माहौल एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता : जिला पदाधिकारी। 2674 विद्यालयों में गूंजा प्रकृति संरक्षण का संदेश, बच्चों ने बनाए पक्षियों के लिए घोंसले।

दरभंगा में कक्षा की छात्रा से छेड़छाड़ करने के आरोपी शिक्षक को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है!

 

कई मासूम छोटी-छोटी छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप पर स्कूल परिसर में ही परिजनों ने काटा बवाल मौके पर पहुंची कई थाना की पुलिस 

दरभंगा :_  एक शिक्षक का दर्जा समाज में माता-पिता के बराबर माना जाता है। लेकिन क्या हो जब वही शिक्षक मासूम बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए? बिहार के दरभंगा से एक ऐसी खबर आई है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

मामला दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय का है। आरोप है कि चौथी कक्षा में पढ़ने वाली एक मासूम बच्ची के साथ स्कूल के ही एक शिक्षक ने अश्लील और अनैतिक हरकत की। जब इस घटना की जानकारी बच्ची के परिजनों और ग्रामीणों को हुई, तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने स्कूल पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और सख्त कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलते ही कई थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। सदर एसडीपीओ-2 एस.के. सुमन ने बताया कि पीड़ित पक्ष के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

लेकिन इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इस शिक्षक पर पहले भी तीन बच्चियों के साथ ऐसी हरकत करने के आरोप लग चुके थे। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत स्कूल के प्रधानाध्यापक से की थी, लेकिन आरोप है कि प्रधानाध्यापक ने मामले को दबाया और किसी वरीय अधिकारी को इसकी सूचना नहीं दी। एसडीपीओ ने इसे प्रधानाध्यापक की गंभीर लापरवाही बताया है।

एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है और बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने की बात करती है। लेकिन अगर बेटियां स्कूल जैसे सुरक्षित समझे जाने वाले स्थान पर भी महफूज़ नहीं हैं, तो इन नारों का क्या औचित्य रह जाता है? यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था की नाकामी दर्शाती है, बल्कि पूरे समाज और हमारी शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।

प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में त्वरित निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दे, ताकि भविष्य में कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे। अब सुनिए क्या कुछ कह रहे हैं सदर SDPO 2 एसके सुमन और ग्रामीण! हा आपको बता दे यह खबर कुछ दिन पूर्व की है!

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Author: Darpan 24 News


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