सरविकल कैंसर पर जीएनएम स्कूल में वर्कशॉप का आयोजन।  

 

बेतिया , पश्चिमी चंपारण बिहार(ब्रजभूषण कुमार):_ऐसे पांच प्रकार के कैंसर होते हैं जो महिलाओं के प्रजनन अंगों जैसे सरविकल, ओवेरियन, युटेरिन ,वेजाइनल एवं वल्वल 3 को नुकसान पहुंचाते हैं ।सर्विक्स यूटेरस का निचला और पतला सिर होता है । जब कैंसर सर्विस में होता है तो इसे सर्वाइकल कैंसर कहते हैं। उक्त बातें डॉक्टर सुधा चंद्रा महिला रोग विशेषज्ञ,और डा नीतु कुमारी , कुंतल भूषण प्राचार्य जीएनएम स्कूल ने जीएनएम स्कूल सदर प्रखंड में एचपीपीवी(ह्यूमन पैपिलोमा वायरस ) वर्कशॉप के दौरान द्वीप प्रज्वल करने के दौरान संयुक्त रूप से कहीं। आगे डॉ चंद्रा ने कहा कि सरविकल कैंसर भारत में महिलाओं के कैंसर का दूसरा प्रमुख कारण है और दुनिया भर के महिलाओं के लिए चौथा सबसे कांमन कैंसर है यह 30 वर्ष से अधिक आयु के महिलाओं में सबसे ज्यादा होता है सरविकल कैंसर से प्रतिदिन 200 महिलाएं की मौत होती है और भारत में हर साल 1.14 लाख नए सरविकल कैंसर के मामले दर्ज होते हैं अच्छी बात यह है कि इस कैंसर को टिके के माध्यम से रोका जा सकता है

 

वही डॉ नीतू कुमारी ने कहा कि सरविकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) नामक वायरस के कारण होता है एचपीवी से संक्रमित सभी महिलाओं को सरविकल कैंसर होने का खतरा होता है ऐसे आकलन है कि भारत में 15 वर्ष से अधिक 49 करोड़ से अधिक महिलाओं में सरविकल कैंसर का खतरा है।

 

वही कुंतल भूषण ,प्राचार्य जीएनएम स्कूल ने कार्यशाला के संबोधन के दौरान कहां की एचपीवी एक ऐसा बड़ा वायरस है जो सेक्स के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है ज्यादातर सेक्शुअली ऐक्टिव लोगों को उनके जीवन में एक समय पर एचपीवी संक्रमण होगा और कुछ महिलाओं को सरविकल कैंसर होगा और एचपीवी संक्रमण ज्यादातर 15 से 25 वर्ष की किशोरी अवस्था और युवा वयस्कों में देखा गया है आगे उन्होंने कहा कि लगभग सभी सरविकल कैंसर एचपीवी के कारण होता है इसके होने के कारण उन्होंने असुरक्षित यौन संबंध ,लैंगिक रूप से प्रसारित होने वाले रोग ,माहवारी स्वच्छता की कमी और कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र इत्यादि शामिल है इस कैंसर को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है एचपीवी (शरर्वावेक) का टीका लेना उचित नीजी स्वच्छता बनाए रखना। इस मौके पर ट्विटर प्रीति कुमारी, शामवेल अनुभव ज्ञान ,आदित्य श्रीवास्तव समेत सभी छात्राएं मौजूद रही।

Mr.M.H.Khan
Author: Mr.M.H.Khan

Editor in Chief

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