बिहार MLC शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र दरभंगा के संभावित निर्दलीय उम्मीदवार अरुण कुमार झा ने ठोका ताल लोकवार्ता के बैनर तले ‘बिहार बचाएगा लोकतंत्र’ का तीसरा कार्यक्रम आयोजित बिना नोटिस आयुष चिकित्सकों के क्लिनिको मे छापामारी कतई बर्दाश्त नहीं करेगा नीम संगठन-डा सुमित कुमार,जिला अध्यक्ष। आशा फैसलिटेटर संघ एटक की बैठक में उठा हक और सम्मान का मुद्दा, 30 दिन के भुगतान समेत कई मांगों पर जोर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर माहौल एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता : जिला पदाधिकारी। 2674 विद्यालयों में गूंजा प्रकृति संरक्षण का संदेश, बच्चों ने बनाए पक्षियों के लिए घोंसले।

सरमोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया : इंजीनियरिंग के महानायक थे- अधीक्षण अभियंता

 

बेतिया, पश्चिमी चंपारण:_ भारत में प्रत्येक वर्ष 15 सितम्बर को अभियंता दिवस महान अभियंता एवं राष्ट्रनिर्माता भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। उनका जीवन तकनीकी दक्षता, अनुशासन, दूरदृष्टि और राष्ट्रसेवा का अद्भुत उदाहरण है। उक्त बातें ई बिनोद कुमार,अधीक्षण अभियंता, तिरहुत नहर अंचल और ई देववंश कुमार, कार्यपालक अभियंता, तिरहुत नहर दो ने अपने कार्यालय परिसर में अतिथि भवन में अभियंता दिवस के अवसर पर दीप प्रज्वलन कर संयुक्त रूप से कहीं। आगे अधीक्षण अभियंता ने कहा कि मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितम्बर 1861 को कर्नाटक के मुद्देनहल्ली में हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा के बाद पुणे के साइंस कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। अपनी असाधारण प्रतिभा और तकनीकी क्षमता के बल पर उन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई।

विश्वेश्वरैया का सबसे महत्वपूर्ण योगदान जल संसाधन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में रहा। उन्होंने ऐसी तकनीकों और व्यवस्थाओं को विकसित करने में योगदान दिया, जिनका उद्देश्य जल का अधिकतम और वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित करना था। कृष्णराज सागर (KRS) बांध जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं से उनका नाम विशेष रूप से जुड़ा है, जिसने मैसूर क्षेत्र में सिंचाई और जलापूर्ति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आगे वही कार्यपालक अभियंता ने कहा कि इंजीनियरिंग के साथ-साथ उन्होंने प्रशासन और राष्ट्र के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे मैसूर राज्य के दीवान रहे और अपने कार्यकाल में औद्योगिक विकास, शिक्षा, बैंकिंग तथा तकनीकी संस्थानों को प्रोत्साहित किया। उनके प्रयासों ने मैसूर को आधुनिक विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आगे उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी विशेषताओं में समय की पाबंदी, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, तकनीकी उत्कृष्टता और कार्य के प्रति समर्पण शामिल थे। उनका मानना था कि देश के विकास के लिए वैज्ञानिक सोच, तकनीकी शिक्षा और योजनाबद्ध विकास अत्यंत आवश्यक हैं।

राष्ट्र के प्रति उनके असाधारण योगदान को देखते हुए वर्ष 1955 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। उन्होंने लगभग एक शताब्दी का जीवन जिया और 14 अप्रैल 1962 को उनका निधन हुआ।

आज के अभियंताओं के लिए प्रेरणा

अभियंता दिवस केवल एक महान अभियंता की जयंती मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन का भी दिन है कि हम अपनी तकनीकी क्षमता का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास के लिए किस प्रकार कर रहे हैं। आज जब देश तेजी से आधारभूत संरचना, जल संसाधन, डिजिटल तकनीक और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, विश्वेश्वरैया के सिद्धांत और कार्यशैली पहले से भी अधिक प्रासंगिक हैं।

एक अभियंता की वास्तविक सफलता केवल किसी परियोजना को पूरा करने में नहीं, बल्कि उसे गुणवत्ता, सुरक्षा, पारदर्शिता, संसाधनों के उचित उपयोग और जनहित के साथ पूरा करने में है।

विश्वेश्वरैया का जीवन हमें यही संदेश देता है कि एक सच्चा अभियंता केवल पुल, सड़क, बांध या भवन का निर्माण नहीं करता, बल्कि वह अपने ज्ञान, नवाचार और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है।

इसी महान विरासत को आगे बढ़ाना प्रत्येक अभियंता की जिम्मेदारी है। इस मौके पर सहायक अभियंता विष्णु कुमार, प्रभात रंजन, कनीय अभियंता, अमन कुमार, मोहम्मद वकार आलम , रूपेश कुमार ,विकास ,अमीत राजकुमार यादव, अक्षय कुमार, प्रधान सहायक शैलेंद्र कुमार सिंह, विक्रांत कुमार लेखा लिपिक , प्रफुल्ल झा आदि मौजूद रहे।

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Author: Darpan 24 News


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