मौखिक आश्वासनों का झुनझुना नामंजूर, राजस्व कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश रहेगा जारी”

बेतिया, पश्चिमी चंपारण, बिहार:_ लिखित समझौतों को ‘रद्दी’ बताने वाले विभाग एवं संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आवाज को दबाने का अचूक प्रयास करने वाली सरकार के विरुद्ध अपनी मांग को मनवाने के लिए राजस्व कर्मचारी कटिबंध है उक्त बातें ललन भारती, जिला अध्यक्ष राजस्व कर्मचारी,जिला ईकाई बुधवार को समाहरणालय में धरना कार्यक्रम सम्बोधित करते हुए कही। आगे श्री भारती ने कहा कि बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (संयुक्त संघर्ष मोर्चा) अपनी 17-सूत्रीय मांगों की पूर्ति हेतु विगत 11 फरवरी 2026 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन ‘सामूहिक अवकाश’ पर है। इसके फलस्वरूप पूरे राज्य में दाखिल-खारिज, परिमार्जन सहित सभी 68 प्रकार के राजस्व कार्य पूरी तरह ठप हैं, जिसकी शत-प्रतिशत जिम्मेदारी सरकार की हठधर्मिता की है। ज्ञात हो कि विगत वर्ष 27 दिनों की ऐतिहासिक हड़ताल के पश्चात्, तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (राजस्व) दीपक कुमार सिंह के साथ दिनांक 2 जून 2025 को एक ‘लिखित सहमति’ बनी थी, जिसे विभागीय ज्ञापांक-353 (दिनांक 04.06.2025) द्वारा संसूचित किया गया था। तत्पश्चात, मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में संपन्न उच्च-स्तरीय बैठक (ज्ञापांक-437, दिनांक 09.07.2025) में भी इन निर्णयों पर मुहर लगी थी।
इसी के आलोक में अधिसूचना संख्या 611 द्वारा राजस्व कर्मचारियों की योग्यता ‘स्नातक’ निर्धारित की गई और ‘ग्रेड-पे 2800 (लेवल-5)’ सहित अन्य मांगों पर सहमति बनी थी। लेकिन 8 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस पर आदेश निर्गत नहीं किया। विभाग को जगाने हेतु संयुक्त मोर्चा ने 2 फरवरी, 5 फरवरी, 9 फरवरी को विशाल धरना दिया
गया और पूर्व-घोषणा के अनुसार 11 फरवरी से राज्य के सभी 3500 राजस्व कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर चले गए। राजस्व कार्य ठप होने पर विभाग ने दिनांक 20 फरवरी 2026 कोउपमुख्यमंत्री-सह-राजस्व मंत्री एवं प्रधान सचिव ( सी. के. अनिल) के साथ वार्ता हेतु शिष्टमंडल को बुलाया। वार्ता में प्रधान सचिव महोदय ने पूर्व की सभी प्रशासनिक परंपराओं को तार-तार करते हुए कहा कि, “तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के साथ जो सहमति-पत्र बना था, उसे हमने रद्दी की टोकरी में फेंक दिया है।”

आगे उन्होंने ने कहा कि इसके बावजूद, मंत्री के सकारात्मक रुख को देखते हुए, दिनांक 23 फरवरी 2026 को संघ ने 17 में से 15 प्रमुख मांगों’ की सूची सरकार को सौंपी। मंत्री ने स्थानांतरण पोर्टल, ईंधन / लैपटॉप भत्ते, ग्रेड-पे में सुधार और प्रोन्नति जैसे कई मौखिक आश्वासन दिए। इन सहमतियों पर सरकार ने कुछ भी’ लिखित’ में देने से साफ इंकार कर दिया। इस पर हमारे प्रतिनिधिमंडल ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि, “जब राज्य के मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव के पूर्व के ‘लिखित’ सहमति-पत्र को ही प्रधान सचिव ‘रद्दी का टुकड़ा’ समझते हैं, तो हम आपके आज के ‘मौखिक’ आश्वासनों पर कैसे विश्वास कर लें?” जब लिखित पत्र को ही कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है, तो मौखिक आश्वासन का क्या भरोसा? तदुपरांत, संयुक्त संघर्ष समिति ने तत्क्षण यह निर्णय लिया कि जब तक सहमति के बिंदुओं पर विधिवत आदेश निर्गत नहीं किया जाता, तब तक हम अपने आंदोलन पर डटे रहेंगे। संघर्ष समिति के नेतृत्वकारी साथियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पूर्व के सार्वजनिक दस्तावेजों (ज्ञापांक 353 व 437) में तय हुए बिंदुओं (ग्रेड पे 2800, गृह जिला में पदस्थापन व पदनाम परिवर्तन वो अन्य) पर विधिवत आदेश निर्गत नहीं किया जाता, हमारा आंदोलन चट्टानी एकता के साथ डटा रहेगा।
संघर्ष समिति (मोर्चा) ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि अपनी मांगों की प्राप्ति के लिए आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग एकलौता ऐसा विभाग है जो अपने ही कर्मी की अनदेखी करता है, कोई सुविधा नहीं देता है, कार्यों का दवाब बढाकर शोषण करता है।
वर्तमान विभागीय सोच
विभाग कर्मियों के मांगों को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है. पूर्व के समझौते को प्रधान सचिव रद्दी मानते हैं और कार्यवाही / छोड़ेंगे नहीं की धमकी देते हैं मंत्री आमजनों में भ्रम फैला रहे हैं कि भू-माफिया के
कहने पर सभी हड़ताल पर हैं. 46 लाख परिमार्जन और नामांतरण को निपटाने में कर्मी बाधा उत्पन्न कर रहे हैं.
राजस्व कर्मचारी 68 प्रकार और कई विभागों के कार्यों को करते हैं. लेकिन विभाग और सरकार का ध्यान मांगो का समझौता अपर मुख्य सचिव एवं मुख्य सचिव से हो जाने के बाद भी पूरा करने की तरफ नहीं है या कहें तो पूरा नहीं करना चाहती है. विभाग चाहती है कि राजस्व कर्मचारी कर्मी बनकर काम न करें बल्कि गुलाम बनकर कम करें. टारगेट कर कारवाही की जा रही है. मंत्री महोदय कहते हैं कि 46 लाख आवेदनों को निष्पादित किया जाये, लेकिन वे चाहते नहीं की निष्पादित हो. ऑनलाइन आवेदनों को निष्पादित करने के लिए कभी कोई सुविधा नहीं दी गयी है. आम रैयत के सुलभ कार्य निष्पादन के लिए लैपटॉप से ऑनलाइन कार्य करने हेतु इन्टरनेट, डोंगल, प्रिंटर, पेपर, कुर्सी, टेबल, पंखा, बिजली, पानी आदि उपलब्ध कराया जाए. क्षेत्र भ्रमण कर कार्य करने हेतु मोटर साइकिल इंधन सहित उपलब्ध कराया जाए ताकि रैयत के आवेदन का जांच ससमय किया जा सके. राजस्व कर्मचारियों से अतिरिक्त हल्का का प्रभार हटाया जाए ताकि राजस्व कर्मचारी एक हल्का के प्रभार में रहें और रैयत को पूर्ण समय देकर उनके कार्यों का निष्पादन कर सकें. 4-5 हल्का के प्रभार में रहने की वजह से रैयत परेशान होते रहते हैं साथ ही कर्मचारी को राजस्व के अलावा अन्य किसी कार्य में नहीं लगाया जाए. लेकिन विभाग ही जिम्मेवार है रैयत के परेशानी का. आम रैयतो में भ्रम फैला कर बरगलाया जा रहा है और कर्मियों को बदनाम करने कि कोशिश की जा रही है और विभाग वो मंत्री अपना पीठ खुद थपथपा रहे है.
“हम जनता के सेवक हैं, विभाग के मनमानेपन के गुलाम नहीं!
हक मिलने तक सामुहिक अवकाश जारी रहेगी।”इस मौके पर कई दर्जन राजस्व कर्मचारी में पवन सिंह,लक्ष्मी रमण आदि मौजूद।
Author: Mr.M.H.Khan
Editor in Chief









