दरभंगा में बे मौसम आंधी और बारिश से फसल हुआ बर्बाद 

दरभंगा:_अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध दरभंगा जिला किसान काउंसिल के वरीय उपाध्यक्ष रामानुज यादव एवं सचिव रामसागर पासवान ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि बेमौसम आंधी एवं बारिश के कारण दरभंगा जिले में फसलों को व्यापक क्षति पहुंची है। विशेष रूप से मक्का और गेहूं की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। तेज हवाओं और वर्षा के कारण गेहूं एवं मक्का की खड़ी फसलें जमीन पर गिर गई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि इस वर्ष कई क्षेत्रों में बाढ़ के कारण किसानों को मक्का एवं गेहूं की बुवाई विलंब से करनी पड़ी थी। ऐसे में तैयार होती फसल का इस तरह नष्ट हो जाना किसानों के लिए दोहरी मार साबित हुआ है। यह स्थिति न केवल किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट उत्पन्न करती है, बल्कि पूरे कृषि तंत्र को भी प्रभावित करती है।

किसान नेताओं ने सरकार से मांग की है कि फसल क्षति का त्वरित और निष्पक्ष आकलन कर प्रभावित किसानों को समुचित मुआवजा एवं राहत प्रदान की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए ठोस और दीर्घकालिक उपाय किए जाएं, ताकि किसानों को बार-बार इस प्रकार की विपरीत परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

 

वहीं, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई (एम)] के राज्य सचिव मंडल सदस्य सह हायाघाट महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी श्याम भारती ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आंधी और वर्षा ने दरभंगा जिले के किसानों की मेहनत पर पूरी तरह पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों की फसलें नष्ट होने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।

 

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार अविलंब क्षति का सर्वेक्षण कर उचित मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू नहीं करती है, तो किसानों के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने यह भी मांग की कि प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाए, कृषि ऋणों को तत्काल माफ किया जाए, तथा अगली बुवाई के लिए मुफ्त बीज और खाद उपलब्ध कराए जाएं।

श्री भारती ने कहा कि यह केवल प्राकृतिक आपदा का मुद्दा नहीं है, बल्कि किसानों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा प्रश्न है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संवेदनशीलता दिखाते हुए किसानों को आर्थिक और सामाजिक रूप से संबल प्रदान करे, अन्यथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

Mr.M.H.Khan
Author: Mr.M.H.Khan

Editor in Chief

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