मोतिहारी:_किसी भी समाज की प्रगति और शांति इस बात पर निर्भर करती है कि वहां की कानून व्यवस्था कितनी मजबूत है। कहते हैं कि अगर दिल में जज्बात हों, कुछ कर गुजरने की लालसा हो और समाज को अपराध मुक्त रखने का जिगर हो, तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं होता। इस कथन को बिहार के मोतिहारी पूर्वी चंपारण जिले में अक्षरशः चरितार्थ कर रहे हैं वहां के वर्तमान पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात।
मोतिहारी में स्वर्ण प्रभात को कमान संभाले अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में ही उन्होंने जिले की कानून व्यवस्था की तस्वीर बदल कर रख दी है। आज आलम यह है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ इस कदर बैठ गया है कि वे या तो अपराध छोड़ रहे हैं या जिला छोड़ने पर मजबूर हैं। अपराधियों के लिए ‘काल’ बन चुके स्वर्ण प्रभात की कार्यप्रणाली की गूँज आज सिर्फ मोतिहारी ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में सुनाई दे रही है।

आखिर कौन हैं स्वर्ण प्रभात, जिन्होंने अपराधियों के दुस्साहस को घुटनों पर ला दिया है? वह एक ऐसे अधिकारी के रूप में उभरे हैं जो तकनीक और त्वरित कार्रवाई के मेल से अपराध का सफाया करने में विश्वास रखते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनकी निर्भीकता और स्पष्ट नीति है”अपराध करोगे तो बख्शे नहीं जाओगे।”
हाल ही का एक मामला उनकी कार्यशैली का जीवंत उदाहरण है, जहाँ एक अपराधी ने जैसे ही पुलिस को चुनौती देने की हिमाकत की, स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में पुलिस ने उसे न केवल ढूंढ निकाला बल्कि उसके आतंक का अंत भी किया। बड़े-बड़े दस्यु सरगनाओं और संगठित गिरोहों की कमर तोड़कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाने वाले वह जिले के एकमात्र ऐसे जांबाज अधिकारी बन गए हैं, जिनके नाम से ही अपराधियों के पसीने छूट जाते हैं।
आज मोतिहारी की जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है। स्वर्ण प्रभात ने यह साबित कर दिया है कि अगर नेतृत्व सही हो और इरादे नेक हों, तो समाज को अपराधियों से स्वच्छ करना कतई नामुमकिन नहीं है। वे न केवल एक पुलिस अधिकारी हैं, बल्कि न्याय और शांति के प्रतीक बन चुके हैं।
Author: Mr.M.H.Khan
Editor in Chief









