हिन्द स्वराज पीठ, दरभंगा के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन: विद्यार्थियों ने गांधी के विचारों को घर-घर पहुँचाने का लिया संकल्प हिन्द स्वराज पीठ, दरभंगा के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का दूसरा दिन: गांधी के ‘हिन्द स्वराज’ को समकालीन संदर्भों में समझने पर जोर एलएनजेपी अस्पताल के तीन चिकित्सकों पर विभागीय कार्रवाई प्रारंभ पटना में पैकेज्ड पेयजल प्रतिष्ठानों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, बिना लाइसेंस संचालित इकाइयों को कराया गया बंद NMCH, पटना में इलाजरत राघोपुर-दियारा नाव दुर्घटना के घायलों एवं उनके परिजनों से माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत जी ने मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। बेतिया से बड़ी खबर, जहां नगर थाना पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है

हिन्द स्वराज पीठ, दरभंगा के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन: विद्यार्थियों ने गांधी के विचारों को घर-घर पहुँचाने का लिया संकल्प

दरभंगा _(संजय कुमार सहनी) _हिन्द स्वराज पीठ, दरभंगा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। विद्यार्थियों ने महात्मा गांधी की कालजयी कृति ‘हिन्द स्वराज’ को अपने दृष्टिकोण से समझने, उसके विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर चिंतन करने तथा उन्हें समाज तक पहुँचाने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों की भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि गांधी के विचारों को नई पीढ़ी के अनुभवों, सवालों और दृष्टिकोणों के साथ जोड़कर व्यापक सामाजिक संवाद का हिस्सा बनाया जा सकता है

अंतिम दिन आयोजित चर्चा में प्रियंका कुमारी, मो. अरमान नूरी, नाजिम मंसूरी, सबीहा नाज़, नेहा कुमारी, रेशमी कुमारी एवं वंदना कुमारी ने अपनी सक्रिय भागीदारी से शिविर को सार्थक बनाया। इन छात्र-छात्राओं ने ‘हिन्द स्वराज’ को केवल एक पुस्तक के रूप में नहीं, बल्कि जीवन, समाज और मानवीय संबंधों को बेहतर बनाने वाली विचार-दृष्टि के रूप में समझने का प्रयास किया। उन्होंने गांधी के विचारों पर अपने विचार रखे और इस बात पर जोर दिया कि इन मूल्यों को व्यवहार में उतारना आज की युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

 

विद्यार्थियों ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि गांधी के विचारों और ‘हिन्द स्वराज’ की प्रासंगिकता पर आधारित ऐसे प्रशिक्षण शिविर प्रत्येक महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में आयोजित किए जाने चाहिए। उनका मानना था कि शैक्षणिक संस्थानों में इस प्रकार के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को गांधी को केवल पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से जानने के बजाय उनके विचारों को समझने, उन पर प्रश्न उठाने, विचार-विमर्श करने और जीवन से जोड़ने का अवसर मिलेगा। इससे गांधी के विचारों को घर-घर तक पहुँचाने तथा समाज में नैतिक चेतना विकसित करने की दिशा में सार्थक पहल हो सकती है।

विद्यार्थियों की चर्चा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष एक ऐसे समाज की कल्पना रहा, जहाँ सभी लोग खुशहाल हों, आपसी प्रेम और सद्भाव बना रहे तथा कोई किसी का अहित न चाहे। उन्होंने इस भावना को गांधीवादी जीवन-दृष्टि से जोड़ते हुए कहा कि समाज में शांति और खुशहाली के लिए केवल बाहरी विकास पर्याप्त नहीं है; इसके लिए मनुष्य के विचारों, व्यवहार और दूसरों के प्रति दृष्टिकोण में भी सकारात्मक बदलाव आवश्यक है। सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता, आत्मानुशासन और परस्पर सम्मान जैसे मूल्यों को अपनाकर ही बेहतर समाज की नींव रखी जा सकती है।

शिविर में विद्यार्थियों की सहभागिता ने यह भी रेखांकित किया कि युवा केवल गांधी के विचारों के श्रोता या पाठक नहीं हैं, बल्कि वे इन विचारों को नए संदर्भों में समझने, उन पर अपनी राय रखने और समाज में उनके प्रसार के लिए पहल करने की क्षमता रखते हैं। उनके सुझावों ने शैक्षणिक संस्थानों में गांधीवादी विचारों पर नियमित संवाद, परिचर्चा, वाद-विवाद, निबंध लेखन और रचनात्मक गतिविधियों के आयोजन की आवश्यकता को सामने रखा।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य ‘हिन्द स्वराज’ के माध्यम से गांधी के विचारों को समकालीन सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ना और आत्मानुशासन, नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा मानवीय संवेदना के महत्व को समझना रहा। अंतिम दिन विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने इस उद्देश्य को एक नई दिशा दी। इससे यह संदेश उभरा कि गांधीवादी चिंतन को समाज में जीवंत बनाए रखने के लिए युवाओं को संवाद और रचनात्मक पहल के केंद्र में रखना आवश्यक है।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर शोभा शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने शिविर में शामिल वक्ताओं, विद्यार्थियों एवं सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

शिविर का समापन इस व्यापक मानवीय संकल्प के साथ हुआ कि गांधी के विचारों को शैक्षणिक संस्थानों से समाज तक पहुँचाया जाए और एक ऐसी दुनिया के निर्माण के लिए प्रयास किया जाए, जहाँ हर व्यक्ति सुख, शांति और सम्मान के साथ रह सके तथा कोई किसी के अहित की कामना न करे। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार और गांधीवादी चिंतक अमरेश्वरी चरण सिंहा, पूर्व प्राचार्य एवं पर्यावरणविद डॉ विद्यानाथ झा, डॉ शारदानंद चौधरी, डॉ संजय कुमार सहनी, भोला यादव, विकास शुक्ला, पत्रकार संघ के महासचिव शशि मोहन भारद्वाज, योगेंद्र यादव, शोभा शुक्ला, इंदिरा कुमारी, इंदु जायसवाल, उपेंद्र पासवान, राम शंकर झा, डॉ बैद्यनाथ प्रसाद, आर वी ठाकुर, रौशन उपाध्याय, विजय कुमार सक्सेना, अभिषेक कुमार झा, सुदर्शन चौपाल, दुर्गा नंद चौधरी हरिदर्शन चौपाल, जितेंद्र मिश्र कमला कुमारी निवेदन प्रियंका बरकतुल्लाह तसीम नवाब, जय शंकर गुप्ता, चंद्रेश, सहित अनेकों गणमान्य शामिल रहे

हिन्द स्वराज पीठ, दरभंगा


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