
दरभंगा :_ दरभंगा मेडिकल कॉलेज पूर्ववर्ती छात्र एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को हुई जिसका आतिथ्य वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मीना महासेठ ने किया। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रमन कुमार वर्मा ने की तथा संचालन सचिव डॉ. सुशील कुमार ने किया।
बैठक में दरभंगा मेडिकल कॉलेज के व्यापक पुनर्निर्माण एवं आधुनिकीकरण के लिए बिहार सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करते हुए सर्वसम्मति से यह मत व्यक्त किया गया कि विकास के साथ-साथ संस्थान की ऐतिहासिक पहचान और विरासत का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है।
अध्यक्ष डॉ. रमन कुमार वर्मा ने कहा कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज की ऐतिहासिक एनाटॉमी–फिजियोलॉजी–बायोकेमिस्ट्री इमारत केवल एक भवन नहीं, बल्कि बिहार की चिकित्सा शिक्षा के गौरवशाली इतिहास, हजारों चिकित्सकों के छात्र जीवन, उनके संघर्ष, उनके शिक्षकों की प्रेरणा तथा संस्थान की शैक्षणिक परंपरा की जीवंत धरोहर है। इस भवन से मेडिकल कॉलेज की प्रारंभिक शैक्षणिक यात्रा जुड़ी रही है और आज भी यह पूर्ववर्ती छात्रों की भावनाओं एवं स्मृतियों का अभिन्न हिस्सा है।

सचिव डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा अधोसंरचना का निर्माण और ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। महाविद्यालय परिसर में प्रस्तावित विकास कार्यों एवं भावी विस्तार के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, इसलिए इस ऐतिहासिक भवन को सुरक्षित रखते हुए विकास कार्यों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सकता है। भूतपूर्व प्राचार्य डॉक्टर के एन मिश्रा ने दरभंगा के महाराजा डॉक्टर रामेश्वर सिंह द्वारा चिकित्सा के विकास के लिए अग्र सोच के साथ भूमि दान की प्रशंसा करते हुए हेरिटेज भवन निर्माण को एनएमसी के दिशा निर्देशों के अनुरूप बताया।
डॉक्टर ओम प्रकाश ने सुझाव दिया कि भवन के आवश्यक जीर्णोद्धार के उपरांत यहाँ दरभंगा मेडिकल कॉलेज के इतिहास, चिकित्सा शिक्षा के विकास, संस्थान के गौरवशाली शिक्षकों एवं पूर्ववर्ती छात्रों की उपलब्धियों, दुर्लभ अभिलेखों तथा ऐतिहासिक छायाचित्रों का स्थायी संग्रहालय विकसित किया जाए, जिससे यह भवन वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन सके।
मीटिंग के प्रारंभ में रामजानकी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं दरभंगा मेडिकल कॉलेज एनाटॉमी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉक्टर एस के कर्ण, डॉक्टर गौरी शंकर झा एवं डॉक्टर भरत प्रसाद ने जानकारी दी कि एनाटॉमी विभाग के महत्वपूर्ण हिस्से ध्वस्त किए जा चूके हैं। डॉक्टर हरि दामोदर सिंह ने बताया कि नवनिर्माण के लिए जिन हिस्सों को ध्वस्त करना जरूरी था, उन्हें ध्वस्त किया जा चुका है। पुरानी बिल्डिंग के बच गए हिस्से नए भवन के निर्माण के लिए आवश्यक नहीं है। उन्हें बचाया जा सकता है। उन्होंने जानकारी दी कि मंगलवार के दिन बीएमआईसीएल के वरीष्ठ अधिकारी आ रहे हैं, इनसे मिलकर अपनी बात रखी जा सकती है। डॉक्टर सुशील कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमण्डल का गठन किया गया जो उनसे मिलकर अपनी मांग रखेगा। साथ ही यह भी निर्णय किया गया कि जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर एसोसिएशन की भावनाओं से अवगत कराया जाए।
बैठक में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में बिहार सरकार से आग्रह किया गया कि इस ऐतिहासिक भवन को ध्वस्त न किया जाए, बल्कि इसे “हेरिटेज-सह-स्मारक भवन” के रूप में संरक्षित एवं विकसित किया जाए। इसे दरभंगा मेडिकल कॉलेज के हजारों पूर्ववर्ती छात्रों की सामूहिक भावना का प्रतिनिधित्व बताया गया। एसोसिएशन की ओर से बिहार सरकार के माननीय स्वास्थ्य मंत्री को संबोधित एक विस्तृत आवेदन भेजने का निर्णय लिया गया। उपस्थित सभी सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार इस ऐतिहासिक भवन के शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं भावनात्मक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसके संरक्षण हेतु सकारात्मक निर्णय लेगी।
बैठक में डॉ. मीना महासेठ, डॉ. ए. के. गुप्ता, डॉ. सावित्री मिश्रा ओझा, डॉ. शशिबाला प्रसाद, डॉ. ओम प्रकाश, डॉ. आशुतोष प्रसाद, डॉक्टर अलका मिश्रा, डॉ. के. एन. मिश्रा, डॉ. एच. डी. सिंह, डॉ. एस. बी. गुप्ता, डॉ. पूनम सिंह, डॉ. पूजा महासेठ, डॉ. सूरज महासेठ, डॉ. विनय कुमार शर्मा, डॉ. सुजाता राय, डॉ. राजेश द्विवेदी, डा जितेंद्र नारायन, डा मधु सिन्हा, डा के के मिश्रा, डा मिहिर चन्द्रा, डा भोला प्रियदर्शी, डा भरत कुमार, डॉक्टर पुष्पा झा, डॉक्टर भारती कुमारी, डॉ. संजन संजू सहित लगभग तीन दर्जन पूर्ववर्ती छात्रों ने भाग लिया। बैठक के अंत में कोषाध्यक्ष डॉ. खुर्शीद दुर्रानी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
Author: Mr.M.H. Khan


सचिव डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा अधोसंरचना का निर्माण और ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। महाविद्यालय परिसर में प्रस्तावित विकास कार्यों एवं भावी विस्तार के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, इसलिए इस ऐतिहासिक भवन को सुरक्षित रखते हुए विकास कार्यों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सकता है। भूतपूर्व प्राचार्य डॉक्टर के एन मिश्रा ने दरभंगा के महाराजा डॉक्टर रामेश्वर सिंह द्वारा चिकित्सा के विकास के लिए अग्र सोच के साथ भूमि दान की प्रशंसा करते हुए हेरिटेज भवन निर्माण को एनएमसी के दिशा निर्देशों के अनुरूप बताया।




