स्वयंसेवकों की विभिन्न टीम बनाकर मनोकामना मंदिर पार्क में भूकंप बाढ़ आग लगी सड़क दुर्घटना आदि का मॉक ड्रिल कराया गया


दरभंगा :_ ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के राष्ट्रीय सेवा योजना कोषांग के द्वारा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समस्तीपुर जिला के 200 एनएसएस स्वयंसेवकों का सात दिवसीय आवासीय युवा आपदा मित्र प्रशिक्षण शिविर छठे दिन जारी रहा। शिविर का प्रारंभ राष्ट्रगीत एवं एनएसएस के लक्ष्य-गीत से हुआ। इस अवसर पर एसडीआरएफ, पटना के हवलदार कृष्णनंदन सिंह, रूपेश कुमार पासवान, देव कुमार, मालिक कुमार, खोखो कुमार, राजू कुमार, तनुजा कुमारी एवं संतोषी कुमारी आदि के साथ ही शिविर संयोजक- डॉ आर एन चौरसिया, डॉ शबनम कुमारी, डॉ सोनू राम शंकर, डॉ रीता कुमारी, डॉ कामेश्वर पासवान, डॉ प्रेम कुमारी, डॉ अनुपम प्रिया, मनीष राज, अक्षय कुमार झा, रवीन्द्र कुमार सिंह, विकास कुमार, अमित कुमार झा, मणिकांत ठाकुर, मुकेश कुमार झा, प्रशांत, विकास, संजय कुमार महतो आदि ने सक्रिय योगदान दिया। वहीं एंबुलेंस, दवा एवं चिकित्सा उपकरणों के साथ सदर अस्पताल, दरभंगा के 5 सदस्यीय टीम उपस्थित रहे।
प्रथम सत्र में एसडीआरएफ प्रशिक्षक- देव कुमार ने भीड़-नियंत्रण की जानकारी देते हुए बताया कि अनियंत्रित भीड़ कभी- कभी आपदा का रूप ले लेती है। अत्यधिक जनसंख्या, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, अफवाह, जुलूस, तीर्थ-यात्रा, पर्व-त्यौहार, खेल, धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों आदि के कारणों से आपदाएं आ सकते हैं। इसलिए भीड़-प्रबंधन अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में बच्चे, वृद्ध, बीमार व्यक्ति एवं महिलाओं पर विशेष ध्यान देने की विशेष जरुरत है।

द्वितीय सत्र में प्रशिक्षक राजू कुमार ने सुरक्षित नौकायन पर विशेष चर्चा करते हुए बताया कि नौका दुर्घटना से बिहार में सैकड़ों लोगों की मौत होती है। सुरक्षित एवं जांचा-परखा नाव, प्रशिक्षित नाविक तथा क्षमतानुसार सवारी ही बैठाने से इसे रोका जा सकते है। उन्होंने नौका के प्रकार एवं उपयोगिता बताते हुए संकट काल में क्या करें, क्या न करें और कैसे करें, की भी पूरी जानकारी दी। कहा कि नौका दुर्घटना प्रायः खराब मौसम, अत्यधिक भार, लापरवाही, तकनीकी खराबी, अवैध मार्ग पर नौकायन तथा सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण होती है।

प्रशिक्षण खोखो कुमार ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम द्वारा ‘डूबने से मौत’ एवं ‘सुरक्षित स्विमिंग’ की विस्तार से जानकारी देते हुए ‘जल- स्वच्छता’ एवं ‘जल-प्रबंधन’ की विधियों एवं महत्वों से स्वयंसेवकों को अवगत कराया। हवलदार कृष्णनंदन सिंह ने बताया कि आपदा के समय एनडीआरएफ या एसडीआरएफ टीम को आने में समय लगता है। यदि प्रशिक्षित स्वयंसेवक हो तो वे प्रारंभिक ‘गोल्डन आवर’ में जान-माल की बहुत हद तक रक्षा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि तैराक हो तभी पानी में जाकर डूबने वाले व्यक्ति को बचाए, अन्यथा रस्सी, डंडे या लाइफ जैकेट पहनकर भी बचा सकते हैं। हवलदार सिंह ने डूब चुके व्यक्ति को पानी से निकालने के विभिन्न तरीकों को विस्तार से बताया।

दोपहर बाद के सेशन में स्वयंसेवकों की अलार्म टीम, स्टेट सिक्योरिटी टीम, सॉल्यूशन टीम, सर्च एंड रेस्क्यू टीम, फर्स्ट एड टीम, ट्रांसपोर्टेशन टीम, मीडिया मैनेजमेंट टीम, हेड इंज्यूरी टीम, अनकॉन्शियस टीम आदि बनाकर मनोकामना मंदिर के सामने वाले पार्क में मॉक ड्रिल किया गया, जिसमें भूकंप, बाढ़, आगलगी, सड़क दुर्घटना आदि से बचाव का पूर्व अभ्यास किया गया। अंतिम सत्र में जांच परीक्षा ली गई, जिसके रिजल्ट के आधार पर 20 सर्वश्रेष्ठ “युवा आपदा मित्र” का चयन किया जाएगा। प्रातः काल में प्रशिक्षक- वैभव झा के द्वारा पीटी एवं योगाभ्यास कराया गया। सत्र का शुभारंभ एवं स्वागत संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ शबनम कुमारी ने किया।
Author: Darpan 24 News











