
बेतिया, पश्चिमी चंपारण, बिहार:_बिहार आपूर्ति सेवा के पदाधिकारियों को आपूर्ति से संबंधित अनेकों कार्य के अतिरिक्त राशन कार्ड अभियान में असंभव लक्ष्य को न्यूनतम मूलभूत सुविधा / संसाधनों के अभाव में निर्दयता पूर्वक जबरन कार्य हेतु दबाव बनाये जाने के विरोध में बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की जानकारी सुशील प्रताप सिंह,जिला अध्यक्ष जिला इकाई बिहार आपूर्ति सेवा पश्चिमी चंपारण बताया कि बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने राज्य के आपूर्ति पदाधिकारियों एवं कर्मियों की लंबित माँगों पर विभागीय स्तर से कोई निर्णय न होने के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। इसके पहले चरण में दिनांक 20.08.26 से 26.08.26 तक राज्य के समस्त आपूर्ति पदाधिकारी काला बिल्ला धारण कर सांकेतिक विरोध दर्ज करायेंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि उस दिन कार्य पूर्णतः सामान्य रूप से जारी रहेगा और जनहित का कोई कार्य बाधित नहीं होगा। इसके बाद भी समाधान न निकलने पर संघ सामूहिक अवकाश और उसके बाद हड़ताल पर जाने को बाध्य होगा। आगे श्री सिंह ने कहा कि संगठन मंत्री गौरव कुमार दिग्विजय ज्योति कुमारी, स्मिता सिन्हा

कार्यालय मंत्री
प्रियंका कुमारी
विधि मंत्री दीपक कुमार भारद्वाज
संघ ने इसी क्रम में विभाग को दो पत्र समर्पित किये हैं। पत्रांक-44 में नये राशन कार्ड निर्गमन अभियान से जुड़ी तकनीकी एवं व्यावहारिक कठिनाइयों का विवरण है, जबकि पत्रांक-45 में वर्षों से लंबित सेवा-हित संबंधी विषयों का उल्लेख करते हुए आंदोलन की पूर्व सूचना दी गयी है। दोनों पत्रों की प्रतिलिपि मुख्य सचिव तथा मंत्री, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को भी भेजी गयी है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री श सन्नी कुमार दिवाकर
संघ ने कहा कि यह निर्णय किसी टकराव अथवा असहयोग की भावना से नहीं लिया गया है। “वर्षों के निरंतर पत्राचार, वार्ता और अनुनय के बाद भी जब एक भी निर्णय का अनुपालन नहीं हुआ, तब यह कदम उठाना पड़ा। इस संवर्ग ने आज तक किसी अभियान में असहयोग नहीं किया है, और आगे भी नहीं करेगा।”
राशन कार्ड अभियान की वास्तविक स्थिति
संघ ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश के आलोक में चल रहे 11,04,425 नये राशन कार्ड निर्गमन अभियान की सफलता के प्रति वह पूर्णतः प्रतिबद्ध है, किंतु क्षेत्रीय स्तर की वास्तविक कठिनाइयों को सामने रखना भी उसका दायित्व है।
सबसे गंभीर प्रश्न समय-सीमा का है। आगे उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा जारी आवेदन प्रपत्र के शीर्षक में ही अंकित है कि यह “लोक सेवा के अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत नया राशन कार्ड के लिए आवेदन पत्र है, अर्थात राशन कार्ड निर्गमन एक वैधानिक अधिसूचित लोक सेवा है जिसके लिए अधिनियम 30 दिनों की समय-सीमा देता है। किंतु विभागीय पत्रांक-4038, दिनांक 19.07.2026 की कंडिका-3 में स्थलीय जाँच के लिए मात्र एक दिन (T+1), कंडिका-5 में सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी की जाँच के लिए T+2 और कंडिका-6 में अनुमंडल पदाधिकारी के अंतिम निर्णय के लिए अधिकतम T+3 निर्धारित कर दिया गया है।
वही दीपक कुमार जिला सचिव जिला आपूर्ति शाखा पश्चिम चंपारण ने कहा कि अधिनियम द्वारा दी गयी अवधि को एक कार्यपालक पत्र के माध्यम से घटाया नहीं जा सकता। “ये तीस दिन विधायिका ने सोच-समझकर दिये हैं, ताकि आवेदन की स्थलीय जाँच हो सके और प्रपत्र में वर्णित उन्नीस अपवर्जन मानकों की पड़ताल की जा सके। एक दिन में यह सब कर पाना व्यावहारिक रूप से असंभव है। इससे जाँच मात्र औपचारिकता बनकर रह जाती है, और उस औपचारिकता पर हस्ताक्षर करने वाला पदाधिकारी कल अंकेक्षण या निगरानी के समक्ष उत्तरदायी ठहराया जाएगा। ”
लक्ष्य-निर्धारण के आधार पर भी संघ ने प्रश्न उठाया है।
विभागीय पत्रांक-3827, दिनांक 14.07.2026 के अनुसार NFSA की अधिसीमा 8,71,26,936 है और
वर्तमान में 8,24,33.130 लाभुक आच्छादित हैं. अतः शेष सीलिंग 46.93,806 बनती है। उसी पत्र के
अनुलग्न में लक्ष्य की गणना का सूत्र भी मंचित है शेष सीलिंग को औसत पवार-आकार 4.25 से
भाग देकर 11,04,425 कार्ड का लक्ष्य निकाला गया है।
संघ ने कहा कि यह लक्ष्य किसी सर्वेक्षण या क्षेत्रीय प्रतिवेदन से नहीं, मात्र एक गणितीय क्रिया से निकाला गया है। “NFSA की सीलिंग एक अधिकतम अनुमेय सीमा है, यह प्रमाण नहीं कि उतने पात्र लाभुक धरातल पर वास्तव में मौजूद भी हैं। यह सीलिंग जिस जनसंख्या-प्रक्षेपण पर आधारित है वह पंद्रह वर्ष पुरानी है। इस बीच पलायन, मृत्यु और आर्थिक स्थिति में सुधार के कारण बहुत से परिवार अपवर्जन मानकों में आ चुके हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि विभाग के अपने पत्र में शब्द “आच्छादित किया जा सकता है” प्रयुक्त हुआ है, जो अनुमतिसूचक है, आदेशात्मक नहीं, किंतु क्षेत्रीय स्तर पर इसे अनिवार्यता के रूप में लागू कराया जा रहा है।
आगे श्री कुमार ने कहा कि संघ का कहना है कि इससे क्षेत्रीय पदाधिकारी दो पाटों के बीच फँस गया है। यदि वह अपवर्जन मानकों का कठोरता से पालन करता है तो लक्ष्य अधूरा रहेगा और उसे लक्ष्य-अप्राप्ति के लिए दंडित किया जाएगा, और यदि लक्ष्य पूरा करने में शिथिलता बरतता है तो कल अपात्र कार्ड पाये जाने पर भी दंड उसी को मिलेगा।
ई-केवाईसी की जटिल समस्या
विभागीय पत्रांक-5068, दिनांक 14.08.2026 द्वारा अब आवेदन में अंकित समस्त लाभुकों का ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके बाद ही आवेदन आगे बढ़ता है। संघ ने बताया कि इससे तीन दिन पूर्व, अपने पत्रांक-43 दिनांक 11.08.2026 के माध्यम से उसने एक सरल समाधान सुझाया था कि लॉगिन में डीलरवार लंबित ई-केवाईसी सूची आवेदन संख्या, नाम, मोबाइल संख्या, पंचायत/वार्ड एवं मैप्ड FPS कोड सहित डाउनलोड करने की सुविधा दे दी जाए, जिससे हर विक्रेता को उसकी दुकानवार सूची सौंपकर एक ही दिन में शिविर लगाकर सामूहिक ई-केवाईसी करायी जा सके। यह सुविधा आज तक उपलब्ध नहीं करायी गयी, जबकि अनिवार्यता लागू कर दी गयी। परिणामस्वरूप पदाधिकारी को प्रत्येक लाभुक को स्वयं खोजना, सम्पर्क करना और दुकान तक लाना पड़ रहा है, जो ई-केवाईसी में विलंब का सबसे बड़ा कारण है।
पोर्टल की स्थिति के संबंध में संघ ने विभाग के ही पत्रांक-4519, दिनांक 05.08.2026 का हवाला दिया, जिसके माध्यम से विभाग ने भारत सरकार को लिखा है कि SMART-PDS RCMS एप्लिकेशन में त्रुटियाँ बनी हुई हैं और इसी कारण 11.07.2026 से 05.08.2026 के बीच मात्र 21,150 आवेदन प्रविष्ट हो सके तथा 13.07.2026 से 29.07.2026 तक मात्र 2,500 राशन कार्ड ही निर्गत हो सके। संघ का कहना है कि जब विलंब का कारण विभाग के अपने अभिलेख में दर्ज है, तब स्पष्टीकरण किससे माँगा जा रहा है।
इस पूरे अभियान के लिए मानव संसाधन उपलब्ध कराये गये हैं, न कंप्यूटर स्कैनर, न वाहन और न ही कोई व्यय-प्रावधान। स्थिति यह है कि प्रति राशन कार्ड औसतन ₹250 से ₹300 का व्यय प्रिंट आउट तथा स्थलीय जाँच का वाहन भाड़ा पदाधिकारियों को अपने वेतन मद से वहन करना पड़ रहा है, और देर रात्रि 1 से 2 बजे तक तथा अवकाश के दिनों में भी कार्य लिया जा रहा है।
एक दिन की वेतन कटौती
संघ ने इसी अभियान से जुड़ी एक घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि दिनांक 17.07.2026 को विभागीय स्तर से मोबाइल/सी०यू०जी० पर सम्पर्क किये जाने के क्रम में कॉल प्राप्त न होने अथवा GPS Live Location उपलब्ध न कराये जाने के आधार पर राज्य के बड़ी संख्या में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों एवं आपूर्ति निरीक्षकों से स्पष्टीकरण माँगते हुए उनके एक दिन का वेतन अवरुद्ध कर दिया गया।
संघ के अनुसार संबंधित पदाधिकारियों ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर विधिवत स्पष्टीकरण समर्पित कर दिया है और उनमें से अधिकांश तथ्यात्मक एवं साक्ष्य-सम्पन्न हैं। कतिपय पदाधिकारी उस तिथि को प्रखंड मुख्यालय में बायोमेट्रिक उपस्थिति के साथ पूर्णतः उपस्थित थे, कतिपय उसी समय क्षेत्र भ्रमण, वाहन चालन अथवा वरीय पदाधिकारी की बैठक में संलग्न थे जहाँ मोबाइल साइलेंट रखना अपरिहार्य था, और अनेक पदाधिकारियों ने कॉल आने के तुरंत बाद बार-बार कॉल बैक किया परंतु विभागीय नंबर लगातार व्यस्त बताता रहा, जिसका कॉल-लॉग साक्ष्य भी संलग्न है।
“मात्र एक कॉल रिसीव न होने के आधार पर, बिना किसी ठोस कारण के, वेतन कटौती जैसी दंडात्मक कार्रवाई पूरे संवर्ग के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। यह कटौती तत्काल वापस ली जानी चाहिए,” संघ ने कहा।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
संघ ने कहा कि प्रखंड आपूर्ति कार्यालय में आज बैठने के लिए कुर्सी, टेबल, अलमारी और फाइल रैक तक विभागीय मद से उपलब्ध नहीं है, और जहाँ हैं भी वे बहुत पुराने एवं जर्जर अवस्था में हैं। डिजिटल कार्यों के लिए लैपटॉप, मोबाइल एवं इंटरनेट पूर्णतः निजी संसाधन से चलाया जा रहा है, जबकि इस संवर्ग का लगभग सम्पूर्ण कार्य अब ऑनलाइन माध्यम से ही होता है। पीडीएस दुकानों की जाँच, निगरानी, छापेमारी, सुदूर क्षेत्रों के भ्रमण, विधि-व्यवस्था संधारण और निर्वाचन संबंधी कार्यों के लिए आवश्यक विभागीय वाहन भी आज तक उपलब्ध नहीं कराया गया है, जबकि अन्य विभागों के समकक्ष प्रखंड-स्तरीय पदाधिकारियों को यह सुविधा प्राप्त है।
आगे उन्होंने कहा कि ने जनवरी 2025 में अपने पत्रांक-03 एवं 04 के माध्यम से कार्यालय व्यय मद तथा राशन कार्ड मद हेतु उपावंटन की माँग की थी, जिस पर आज तक कोई उपावंटन निर्गत नहीं हुआ। ऑनलाइन राशन कार्ड का सम्पूर्ण कार्य आज भी मात्र मौखिक आदेश के तहत, बिना किसी बजटीय प्रावधान के कराया जा रहा है।
मानव बल के संबंध में संघ ने विभाग के ही पत्रांक-2291, दिनांक 15.04.2010 का उल्लेख किया, जिसके द्वारा समस्त जिला पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि प्रत्येक प्रखंड आपूर्ति कार्यालय को दो कमरे, दो सहायक एवं दो अनुसेवक अविलंब उपलब्ध कराये जाएँ। “आज सोलह वर्ष बीत चुके हैं और राज्य के किसी भी जिले में यह आदेश लागू नहीं हुआ। वर्तमान में पूरे प्रखंड आपूर्ति कार्यालय में मानव-बल के नाम पर एक मात्र कार्यपालक सहायक पदस्थापित है, और उसे भी प्रायः अनुमंडल या जिला कार्यालय अन्य कार्यों में लगा देता है। उसी एक सहायक के सहारे खाद्यान्न वितरण, ई-पॉस अनुश्रवण, आपूर्ति निरीक्षण, विधि-व्यवस्था, निर्वाचन कार्य और अब यह विशाल राशन कार्ड अभियान भी चलाया जा रहा है।”
प्रोन्नति, वेतनमान और संवर्ग पुनर्गठन
उन्होंने ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग की गजट अधिसूचना संख्या-19300, दिनांक 13.10.2023 एवं तद्नुरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-5144, दिनांक 28.11.2023 द्वारा 61 पदाधिकारियों को सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी के पदानुक्रम में उच्चतर प्रभार दिया गया था। यही इस संवर्ग की अंतिम प्रोन्नति थी। उसके बाद लगभग दो वर्ष नौ माह में एक भी प्रोन्नति नहीं हुई है, जबकि आज भी लगभग 200 पद रिक्त पड़े हैं और इस हेतु डीपीसी की बैठक तक आहूत नहीं की गयी।
वेतनमान विसंगति के संबंध में संघ का कहना है कि एक ही बीपीएससी संयुक्त (असैनिक) प्रतियोगिता परीक्षा से चयनित अन्य संवर्गों को प्रथम प्रोन्नति पर पे लेवल-7 से लेवल-9 प्राप्त हो रहा है, जबकि आपूर्ति निरीक्षकों का प्रथम प्रोन्नति सोपान लेवल-8 ही है, जो सेवा-न्याय की दृष्टि से असमानता का प्रतीक है।
संवर्ग पुनर्गठन के प्रश्न पर संघ ने कहा कि वर्ष 2007 के बाद बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम-2011, बिहार लोकायुक्त अधिनियम-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013, बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम-2016 और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 जैसे अनेक अधिनियम लागू हुए, जिनका सीधा दायित्व इसी संवर्ग पर आया, किंतु संवर्ग का विस्तार उसके अनुरूप नहीं हुआ। इसी अवधि में बिहार प्रशासनिक सेवा, वित्त सेवा, ग्रामीण विकास सेवा, राजस्व एवं भूमि सुधार तथा सचिवालय सेवा – सभी का पुनर्गठन हो चुका है, केवल आपूर्ति सेवा संवर्ग 18 वर्षों से इससे वंचित है। इसका परिणाम यह है कि 69वीं एवं 70वीं बीपीएससी से नियुक्त लगभग 80 प्रतिशत पदाधिकारियों को भविष्य में एक भी प्रोन्नति का अवसर नहीं मिल पाएगा, और 64वीं बीपीएससी से नियुक्त आधे से अधिक पदाधिकारियों को दूसरी प्रोन्नति का अवसर नहीं मिलेगा।
संघ ने एक व्यावहारिक विसंगति की ओर भी ध्यान दिलाया कि 70वीं बीपीएससी के माध्यम से भारी संख्या में पदाधिकारियों की बहाली की गयी है, जबकि उनके नीचे कार्य करने के लिए एक भी सहायक स्टाफ उपलब्ध नहीं है। “अधिकारी और बहाल करने के स्थान पर उनके नीचे डाटा एंट्री ऑपरेटर, लिपिक एवं अनुसेवक की बहाली की जानी चाहिए आज की आवश्यकता यही है।”
शक्तियों का अभाव और सात पदाधिकारियों का निलंबन
उन्होंने ने कहा कि वर्ष 2018 से आपूर्ति निरीक्षक की नियुक्ति उसी बीपीएससी संयुक्त (असैनिक) प्रतियोगिता परीक्षा से हो रही है जिससे अनुमंडल पदाधिकारी का भी चयन होता है। दोनों की शैक्षणिक योग्यता, चयन प्रक्रिया और परीक्षा एक ही है, अंतर मात्र मेधा-क्रम का है, किंतु दोनों को प्राप्त शक्तियों में अत्यधिक अंतर है।
“जो पदाधिकारी प्रतिदिन जन वितरण प्रणाली दुकानों की जाँच करता है, वह अनियमितता पाये जाने पर न स्वयं कारण-पृच्छा निर्गत कर सकता है, न आवंटन पर उसका कोई नियंत्रण है। फिर भी वितरण की किसी भी अनियमितता का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व अंततः उसी पर आता है।”उन्होंने ने बताया कि जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं को मासिक खाद्यान्न आवंटन किस आधार पर और किस अनुपात में निर्गत होगा, इसकी कोई मानक पद्धति आज तक निर्धारित नहीं है, जिससे दुकानों को प्रायः माँग से कम अथवा विलंब से आवंटन मिलता है और पात्र लाभुक वंचित रह जाते हैं। इसी प्रकार अनुज्ञप्ति निर्गत करनेएवं विक्रेता पर कार्रवाई के समय वास्तविक प्राधिकारी गैर-विभागीय पदाधिकारी हो जाते हैं, जिससे पणन पदाधिकारी एवं आपूर्ति निरीक्षक की जाँच में अनियमितता प्रमाणित होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।
इसी संदर्भ में संघ ने “जीरो ऑफिस डे” अभियान के अंतर्गत 07 आपूर्ति पदाधिकारियों के निलंबन को अनुचित बताते हुए कहा कि जिस निम्न गुणवत्ता वाले खाद्यान्न को आधार बनाया गया, वह टीपीडीएस गोदाम द्वारा आपूर्ति किया गया था, जिस पर आपूर्ति पदाधिकारी का कोई नियंत्रण नहीं होता। संघ ने माँग की है कि उस संदर्भ में संचालित समस्त विभागीय कार्रवाई अविलंब सांचिकास्थ की जाए तथा लक्षित सार्वजनिक
वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2016 में संशोधन कर पणन पदाधिकारी एवं आपूर्ति निरीक्षक को कारण-पृच्छा निर्गत करने, आवंटन की अनुशंसा करने एवं अनुज्ञप्ति निलंबन करने की शक्ति प्रदान की जाए।
कार्य-घंटे एवं क्षतिपूर्ति अवकाश
कहा कि ने कहा कि जिला एवं अनुमंडल स्तर से प्रायः मौखिक आदेश पर देर रात्रि तक तथा अवकाश के दिनों में भी कार्य लिया जाता है, किंतु वित्त विभाग के आदेशानुसार देय भोजन एवं अल्पाहार की व्यवस्था नहीं की जाती और बिहार सेवा संहिता के अंतर्गत देय क्षतिपूर्ति अवकाश भी नहीं दिया जाता। संघ ने इनकी अनिवार्य व्यवस्था तथा मानक कार्य-घंटे के निर्धारण की माँग की है।
संघ की प्रमुख माँगें
1. प्रत्येक प्रखंड में अन्य विभागों के समकक्ष पदाधिकारियों की भाँति विभागीय वाहन, अथवा वाहन भाड़ा की समुचित मासिक राशि, स्वीकृत की जाए।
2. प्रखंड आपूर्ति कार्यालय हेतु कुर्सी, टेबल, अलमारी, फाइल रैक, कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर तथा लैपटॉप/मोबाइल/इंटरनेट सहित बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करायी जाएँ; कार्यालय व्यय मद एवं राशन कार्ड मद में पृथक-पृथक उपावंटन निर्गत हो; तथा राशन कार्ड निर्गमन/संशोधन/विलोपन कार्य हेतु स्पष्ट विभागीय अधिसूचना/संकल्प/परिपत्र निर्गत किया जाए, ताकि यह कार्य मौखिक आदेश के स्थान पर विधिवत आदेश के अंतर्गत सम्पादित हो।
3. प्रथम प्रोन्नति पर आपूर्ति निरीक्षकों को पे लेवल-8 के स्थान पर पे लेवल-9 का लाभ प्रदान किया जाए।
4. गजट अधिसूचना संख्या-19300, दिनांक 13.10.2023 के आलोक में डीपीसी की बैठक अविलंब आहूत कर कुल लगभग 200 रिक्त पदों जिला आपूर्ति पदाधिकारी, सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी एवं पणन पदाधिकारी पर उच्चतर प्रभार प्रदान किया जाए। जो की लगभग आज तक लगभग दो वर्ष नौ माह बिहार आपूर्ति सेवा संवर्ग में एक भी प्रोन्नति नहीं हुई है
5. संवर्ग पुनर्गठन (केडर रिस्ट्रक्चरिंग)
संघ द्वारा पूर्व में समर्पित प्रस्ताव के अनुरूप संवर्ग का पुनर्गठन कर नयी संवर्ग नियमावली अधिसूचित की जाए; साथ ही अधिकारी-स्तर पर और बहाली के स्थान पर प्रखंड स्तर पर सहायक स्टाफ (डाटा एंट्री ऑपरेटर, लिपिक एवं अनुसेवक) की बहाली/पदस्थापन किया जाए।
6. विभागीय पत्रांक-2291, दिनांक 15.04.2010 का अनुपालन कराते हुए प्रत्येक प्रखंड आपूर्ति कार्यालय को दो कमरे, दो सहायक एवं दो अनुसेवक उपलब्ध कराये जाएँ। (यह विभाग का स्वयं का सोलह वर्ष पुराना आदेश है- कोई नयी माँग नहीं।)
7. “बिहार आपूर्ति सेवा नियमावली-2007” में संशोधन कर “आपूर्ति निरीक्षक” का पदनाम “प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी” किया जाए एवं पद को राजपत्रित घोषित किया जाएः साथ ही प्रखंड आपूर्ति
पदाधिकारी को निकासी एवं व्ययन (डीडीओ) की शक्ति दी जाए, ताकि उपावंटन अनुमंडल/जिला स्तर पर रुके बिना प्रखंड तक पहुँचे।
8. “लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2016” में संशोधन कर पणन पदाधिकारी (मो) एवं आपूर्ति निरीक्षक को कारण-पृच्छा निर्गत करने, आवंटन की अनुशंसा करने एवं अनुज्ञप्ति निलंबन करने की शक्ति प्रदान की जाए; खाद्यान्न आवंटन हेतु स्पष्ट एवं मानक फार्मूला निर्धारित हो; जाँच प्रतिवेदन पर समयबद्ध कार्रवाई की बाध्यता होः तथा “जीरो ऑफिस डे” अभियान के अंतर्गत निलंबित 07 आपूर्ति पदाधिकारियों का निलंबन वापस लिया जाए।
9. कार्यालयीन अवधि के उपरांत कार्य लेने पर वित्त विभागीय आदेशानुसार भोजन एवं अल्पाहार, तथा अवकाश के दिन कार्य लेने पर बिहार सेवा संहिता के अनुरूप क्षतिपूर्ति अवकाश अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए एवं मानक कार्य-घंटे निर्धारित किये जाएँ।
10. वर्तमान राशन कार्ड अभियान हेतु प्रत्येक प्रखंड को अतिरिक्त मानव बाल, कंप्यूटर, स्कैनर, इंटरनेट एवं वाहन उपलब्ध कराया जाए; संघ के पत्रांक-44 के समस्त बिंदुओं पर लिखित आदेश निर्गत हो; लक्ष्य-अप्राप्ति अथवा तकनीकी विफलता के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई न की जाए; तथा दिनांक 17.07.2026 की वेतन कटौती तत्काल वापस ली जाए। लोक सेवा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित 30 दिवसीय वैधानिक समय-सीमा बहाल की जाए और ट+1/ट+2/ट+3 की अवधि वापस ली जाए।
संघ ने अंत में कहा कि उसकी माँगों में कोई भी ऐसी नहीं है जो अव्यावहारिक अथवा अभूतपूर्व हो। इनमें से अधिकांश पर निर्णय स्वयं विभाग एवं सरकार पूर्व में ले चुके हैं और आवश्यकता मात्र उनके अनुपालन की है। कुछ विषयों पर अनेक वार्ताओं में सहमति भी बन चुकी है और यह स्वीकार किया गया है कि उनसे विभाग पर कोई आर्थिक भार नहीं पड़ता। शेष विषय विशुद्ध रूप से प्रशासनिक हैं, जिनका समाधान विभागीय स्तर से ही संभव है।
“हम काम से पीछे नहीं हट रहे। केवल इतना है कि जो कार्य विधि के अनुसार तीस दिनों का है, उसे एक दिन में कराने का आग्रह न हो; जो लक्ष्य सर्वेक्षण से निकलना चाहिए वह गणना से न निकले; और जो साधन विभाग ने स्वयं वर्षों पूर्व स्वीकृत किये थे, वे कम-से-कम अब उपलब्ध हो जाएँ, सूचना प्रसारण मंत्री सन्नी कुमार दिवाकर ने कहा, संघ ने यह भी कहा है कि यदि निर्धारित तिथि से पूर्व वार्ता होकर उपर्युक्त विषयों पर लिखित निर्णय निर्गत होता है, तो वह अपने प्रस्तावित कार्यक्रम को स्थगित करने पर सहर्ष विचार करेगा।
Author: Darpan 24 News











